फाइनल में क्रोएशिया का मुकाबला ‘अफ्रीका’ से,शरणार्थियों को लेकर बहस

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फाइनल में क्रोएशिया का मुकाबला ‘अफ्रीका’ से, शरणार्थियों को लेकर बहस-Sports News

फ्रांस को 20 साल के इंतजार के बाद फुटबॉल विश्व कप का खिताब दिलाने में अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों का बड़ा योगदान रहा। गत रविवार को खेले गए फीफा विश्व कप फाइनल में क्रोएशिया को 4-2 से हराने वाली फ्रांसीसी टीम के 23 सदस्यों में से 15 तो अफ्रीकी मूल के ही थे। इन्हीं खिलाड़ियों ने फ्रांस का 1998 के बाद फिर से विश्व विजेता बनने का सपना पूरा किया। इसी वजह से यह भी कहा जा रहा था कि फाइनल मुकाबले में क्रोएशिया का मुकाबला ‘अफ्रीका’ से है। दुनिया भर में शरणार्थियों को लेकर चल रही बहस के बीच फ्रांसीसी टीम वैश्विक भाईचारे का भी संदेश देती है। अफ्रीकी महाद्वीप के कई देश फ्रांस की जीत में ही अपनी जीत देख रहे हैं।

काइलियन एम्बाप्पे के माता-पिता अफ्रीकी देश से
फुटबॉल की दुनिया के अगले महान खिलाड़ी माने जा रहे फ्रांसीसी टीम के 19 वर्षीय स्ट्राइकर काइलियन एम्बाप्पे के पिता कैमरून के हैं और माता अल्जीरिया से हैं। विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी चुने गए एम्बाप्पे ने इस विश्व कप में चार गोल कर अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इनमें फाइनल और अर्जेंटीना के खिलाफ अहम प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में उन्होंने गोल दागे। विश्व कप फाइनल में सबसे कम उम्र में गोल करने के मामले में भी वह पेले के बाद दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। एम्बाप्पे को कैमरून फुटबॉल संघ ने भी अपने देश से खेलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

FIFA WC 2018:दुनिया भर में शरणार्थियों को लेकर चल रही बहस के बीच फ्रांसीसी टीम वैश्विक भाईचारे का भी संदेश देती है। अफ्रीकी महाद्वीप के कई देश फ्रांस की जीत में ही अपनी जीत देख रहे हैं।

फाइनल में क्रोएशिया का मुकाबला ‘अफ्रीका’ से, शरणार्थियों को लेकर बहस-Sports News

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मिडफील्ड में पॉल पोग्बा की मजबूत दीवार खड़ी थी
फ्रांसीसी मिडफील्ड की मजबूत दीवार माने जाने वाले पॉल पोग्बा अपने देश के लिए 10 गोल कर चुके हैं। पोग्बा के माता-पिता गिन्नी से हैं। यहां तक कि उनके भाई अभी भी वहीं की राष्ट्रीय टीम से खेलते हैं। विश्व कप फाइनल में उन्हीं के गोल की बदौलत फ्रांस ने 3-1 से बढ़त हासिल की थी। फ्रांस ने विश्व कप के 7 मैचों में महज छह गोल खाए, जिनमें से तीन अर्जेंटीना और 2 क्रोएशिया के खिलाफ थे। चार मैचों में तो विपक्षी टीम उनके खिलाफ एक भी गोल नहीं कर सकी। इसके पीछे का कारण पॉल पोग्बा के नेतृत्व वाली मजबूत मिडफील्ड थी। पोग्बा ने न सिर्फ विपक्षी टीम के हमले नाकाम किए बल्कि खुद मौके भी बनाए।

फ्रांस की टीम में अन्य अफ्रीकी देशों का भी प्रतिनिधित्व
सैमुअल उमतिती कैमरून से, स्टीव मनदांदा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, एन. गोलो कांन्टे माली से हैं। ब्लेज मातुदी के माता-पिता अंगोला से हैं, जो बाद में फ्रांस आकर बस गए। प्रेसेनल किमपेम्बे और स्टीवन जोन्जी के पिता कॉन्गो से हैं। इसी तरह कॉरेन्टिन टोलिसो के पिता टोगो से हैं।

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