मोदी सरकार ट्रिपल तलाक संशोधन बिल आज करेगी राज्यसभा में पेश

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संसद के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन है. मोदी कैबिनेट ने ट्रिपल तलाक बिल (triple talaq bill) में संशोधन को मंजूरी दे दी है और आज मोदी सरकार ट्रिपल तलाक संशोधन बिल राज्यसभा में पेश करेगी. अगर विधेयक ऊपरी सदन में पारित हो जाता है तो इसे संशोधन पर मंजूरी के लिए वापस लोकसभा में पेश करना होगा.

News,Latest News,News today,Breaking News,Current news,Political News,Hindi News,Election Result सूत्रों की मानें तो ट्रिपल तलाक संशोधन बिल को आज राज्यसभा की कार्यवाही में टॉप एजेंडे के तौर पर शामिल कर लिया गया है. मोदी कैबिनेट की इस ट्रिपल तलाक संशोधन बिल में जमानत जैसे कुछ संरक्षणात्मक प्रावधानों को मंजूरी दी गई है.  बता दें कि नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा.

बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने इस बिल में कई तरह की कमियां बताई थीं, जिसके बाद बिल को संशोधित किया गया है.

इस मामले में कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई के बयान पर विवाद छिड़ गया है. दलवई ने कहा कि शक के आधार पर राम ने भी सीता को छोड़ा था. हर धर्म में पुरुषों का वर्चस्व है तो ऐसे में इस्लाम पर ही सवाल क्यों?

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तीन तलाक बिल पर रणनीति को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के दफ्तर में एक बैठक बुलाई है. जिसमें अमित शाह, अनंत कुमार के अलावा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मौजूद हैं.

गौरतलब है कि गुरुवार को ही राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव हुए हैं, इस चुनाव में एनडीए के हरिवंश सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है. यही कारण है कि एनडीए की स्थिति अभी मजबूत नज़र आ रही है. ऐसे में केंद्र सरकार चाहेगी कि सत्र का अंत होते हुए वह तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करवा पाए.

साथ ही विधेयक में एक और संशोधन किया गया है जिसमें पीड़ित के रिश्तेदार जिससे उसका खून का रिश्ता हो भी शिकायत दर्ज कर सकता है. बता दें कि पिछले सत्र में राज्यसभा में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक देखने को मिली थी. जब विपक्ष की तरफ से विधेयक को त्रुटिपूर्ण बताते हुए प्रवर समिति में भेजने की मांग की गई थी.

ट्रिपल तलाक संशोधन बिल से जुड़ी अहम जानकारियां

ट्रायल से पहले पीड़िता का पक्ष सुनकर मजिस्ट्रेट दे सकता है आरोपी को जमानत.

पीड़िता, परिजन और खून के रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करा सकते हैं.

मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा.

एक बार में तीन तलाक बिल की पीड़ित महिला मुआवजे की अधिकार

गौरतलब है कि संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हुआ था, इस सत्र में ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. अविश्वास प्रस्ताव में भी मोदी सरकार को बड़ी जीत मिली थी.

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