सीएम रघुवर दास:बल्कि बेहतर प्रशासन व प्रबंधन की जरूरत, शिक्षा विभाग को पैसा नहीं

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सीएम रघुवर दास:बल्कि बेहतर प्रशासन व प्रबंधन की जरूरत, शिक्षा विभाग को पैसा नहीं

रांची| मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से सुधार हो रहा है. इसके बाद भी दोनों क्षेत्र में काफी काम करने की आवश्यकता है. शिक्षा विभाग को पैसा नहीं बल्कि बेहतर प्रशासन व कुशल प्रबंधन की आवश्यकता है.सीएम रघुवर दास:बल्कि बेहतर प्रशासन व प्रबंधन की जरूरत, शिक्षा विभाग को पैसा नहीं उक्त बातें मुख्यमंत्री ने बुधवार को होटल बीएनआर में स्कूलों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा में एनजीओ के सहयोग विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही.कार्यशाला में देश भर से आये लगभग दो दर्जन स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षा विभाग में तीन युवा आइएएस अधिकारियों को पदस्थापित किया है. इससे विभाग के कार्य में और तेजी आयेगी. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज व देश के विकास के लिए शिक्षा आवश्यक है. शिक्षा के बिना विकास की बात नहीं की जा सकती है. कहा कि झारखंड को हमें शिक्षित  प्रदेश बनाना है.  स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी राज्य के 38 हजार स्कूलों में मात्र सात हजार स्कूलों में बेंच-डेस्क व छह हजार स्कूलों में बिजली की व्यवस्था थी. पिछले तीन वर्ष में सरकार ने शत-प्रतिशत स्कूलों में बेंच-डेस्क उपलब्ध कराया. 90 फीसदी स्कूलों में बिजली पहुंच गयी है.

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स्कूलों में आधारभूत संरचना ठीक किये  बिना शिक्षा के स्तर को सुधारा नहीं जा सकता. उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ज्यादा काम करने की अपील की .  झारखंड राज्य विकास परिषद के सीइओ अनिल स्वरूप ने कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया. कहा कि एनजीओ ने देश के विभिन्न राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र  में बेहतर कार्य किया है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल, राज्य परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह, प्राथमिक शिक्षा निदेशक आकांक्षा रंजन समेत राज्य भर के शिक्षा पदाधिकारी उपस्थित थे. कार्यशाला में चार एनजीओ के साथ एमओयू भी किया गया.सीएम रघुवर दास:बल्कि बेहतर प्रशासन व प्रबंधन की जरूरत, शिक्षा विभाग को पैसा नहीं

दिसंबर तक सभी स्कूलों में बिजली – मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि  इस वर्ष दिसंबर तक सभी स्कूलों में बिजली कनेक्शन देने का कार्य पूरा कर लिया जायेगा. स्कूलों में बेंच-डेस्क उपलब्ध करा दिया गया है. दिन में मध्याह्न भोजन दिया जा रहा है.

टेस्ट में मात्र 25 फीसदी शिक्षक को 80 फीसदी से अधिक अंक – स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने कहा शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव हुए हैं. दो वर्षों में छह हजार स्कूलों को मर्ज किया गया है. सात हजार ऐसे स्कूल हैं जिसमें नामांकित बच्चों की संख्या 30 से कम है. शिक्षकों को पठन-पाठन की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है. प्रशिक्षण के बाद हुए टेस्ट में मात्र 25 फीसदी ऐसे शिक्षक पाये गये जिन्हें 80 फीसदी से अधिक अंक मिला. 60 फीसदी से अधिक अंक वाले मात्र 40 फीसदी शिक्षक हैं. जबकि प्रश्न का स्तर विद्यालयों में बच्चों के लिए हुए राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे के अनुरूप था. शिक्षकों को भी प्रशिक्षण की आवश्यकता है. विभाग इस क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रहा है. उच्च माध्यमिक कक्षा में राज्य में नामांकन अनुपात राष्ट्रीय मानक से कम है. राष्ट्रीय अनुपात 32 है जबकि झारखंड में 24 फीसदी है. इसमें सुधार की आवश्यकता है. इसके लिए प्लस टू विद्यालय खोले गये हैं. राज्य में और प्लस टू विद्यालय खोलने की योजना है.

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