हड़ताल:90 लाख ट्रक ड्राइवर,बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दाम

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बिज़नेस| डीजल की कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी और टोल टैक्स कम करने समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर ट्रक ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्टरों ने शु्क्रवार से अनिश्च‍ितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. ट्रक और बस ऑपरेटर्स संगठन (एआईएमटीसी) से जुड़े तकरीबन 90 लाख ट्रक और 50 लाख बस हड़ताल पर चले गए हैं.हड़ताल:90 लाख ट्रक ड्राइवर,बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दामट्रकों की हड़ताल के चलते खाने और पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. ट्रकों की रफ्तार पर ब्रेक लगने से रोजमर्रा के जरूरत की चीजों की कमी हो सकती है.

इनकी मांग?-ट्रक ऑपरेटर और ट्रांसपोर्टर लगातार डीजल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं. उनकी मांग है कि डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, ताकि उन्हें इसकी बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके. इसके अलावा उनका तर्क है कि डीजल के दाम रोज बदलने से उन्हें किराया तय करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.हड़ताल:90 लाख ट्रक ड्राइवर,बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दाम

बदले टोल व्यवस्था- डीजल को जीएसटी के तहत लाने के अलावा ऑपरेटर्स की मांग है कि टोल सिस्टम में भी बदलाव लाया जाए. इनका दावा है कि टोल प्लाजा पर न सिर्फ उन्हें समय का नुकसान झेलना पड़ता है, बल्क‍ि इससे उनका काफी मात्रा में ईंधन भी बरबाद होता है. इससे उन्हें सालाना लाखों की चपत लगती है.

बीमा प्रीमियम पर छूट- ट्रक ऑपरेटर्स की मांग है कि उन्हें थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी में छूट दी जानी चाहिए. इसके अलावा एजेंट्स को मिलने वाले अतिरिक्त कमीशन को खत्म किया जाना चाहिए. अगर ट्रक ऑपरेटर्स की यह हड़ताल कुछ और दिन जारी रहती है, तो इससे आम आदमी को काफी ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है.डीजल की कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी और टोल टैक्स कम करने समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर ट्रक ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्टरों ने शु्क्रवार से अनिश्च‍ितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. ट्रक और बस ऑपरेटर्स संगठन (एआईएमटीसी) से जुड़े तकरीबन 90 लाख ट्रक और 50 लाख बस हड़ताल पर चले गए हैं.ट्रकों की हड़ताल के चलते खाने और पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. ट्रकों की रफ्तार पर ब्रेक लगने से रोजमर्रा के जरूरत की चीजों की कमी हो सकती है.

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इनकी मांग- ट्रक ऑपरेटर और ट्रांसपोर्टर लगातार डीजल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं. उनकी मांग है कि डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, ताकि उन्हें इसकी बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके. इसके अलावा उनका तर्क है कि डीजल के दाम रोज बदलने से उन्हें किराया तय करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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